Thursday, July 18, 2013

खुदाया...

मन के मेरे यह भरम 
कच्चे मेरे यह करम 
लेके चले है कहाँ 
मैं तो जानु ही ना 

तू है मुझमें समाया 
कहाँ लेके मुझे आया 
मैं हूँ तुझमें समाया 
तेरे पीछें चला आया 
तेरा ही मैं एक साया 
तूने मुझको बनाया 
मैं तो जग को न भाया 
तूने गलेसे लगाया 
अब तू ही है खुदाया 
सच तू ही है खुदाया...

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